94 वर्ष की उम्र में करुणानिधि का निधन, जाने रोचक बातें उनके बारे में

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तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम करूणानिधि अब इस दुनिया में नहीं रहें। लम्बे समय से उनकी तबियत ठीक नहीं थी. उन्हें ब्लड प्रेशर की समस्या के चलते 28 जुलाई को चेन्नई के कावेरी अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। जिसके बाद से उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आ रही थी। आज 7 अगस्त 2018 को चेन्नई के कावेरी अस्पताल में अंतिम सांस ली.

आपको बता दे की उनकी उम्र 94 वर्ष था. हज़ारो की संख्या में कावेरी अस्पताल के बहार उनके समर्थक प्रार्थना कर रहे थे कि वह जल्द ही सेहतमंद हो जाएं, लेकिन बहुत ही दुःखद खबर आयी. कावेरी अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया है कि उनका स्वास्थ बीती रात से ज्यादा खराब हो चुकी थी।

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टॉप 5 सबसे लंबे समय तक सत्तारूढ़ मुख्यमंत्री

आपको बता दे की एम करूणानिधि एक सफल और लोकप्रिय नेता थे. वो 18 वर्ष, 293 दिनों तक तमिलनडु के CM की कुर्षी पर रहें। उनका नाम भारत के टॉप 5 सबसे लंबे समय तक सत्तारूढ़ मुख्यमंत्री में था. करुणानिधि 5 बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे। जिसमें साल 1969, 1971, 1989, 1996 और 2006 शामिल है.

कई किताबे और सिनमा का पटकथा लिखते थे.

राजनेता होने के साथ-साथ करुणानिधि कई किताबें उपन्यास और नाटक भी लिख चुके थे। यही नहीं वो मूवी के लिए स्क्रीन राइटिंग और स्क्रिप्ट राइटिंग भी करते थे. सिनेमा से उनका काफी लगाव था. इसी के चलते उनके समर्थक प्यार से उन्हें कलाइनार यानि की कला का माहिर कहते थे। आपको बता दें कि करुणानिधि ने अपने जीवन के दौरान तीन शादियां की थी और उनके चार बेटे हैं।

14 वर्ष की आयु में पॉलिटिक्स ज्वाइन की 

करुणानिधि ने 14 साल की उम्र में राजनीति में प्रवेश किया, जो कि न्यायमूर्ति पार्टी के अलगिरिसवामी द्वारा भाषण से प्रेरित थे, और हिंदी विरोधी आंदोलनों में भाग लिया। उन्होंने अपने इलाके के स्थानीय युवाओं के लिए एक संगठन की स्थापना की। उन्होंने मानवार नेसन नामक एक हस्तलिखित समाचार पत्र को अपने सदस्यों के लिए प्रसारित किया। बाद में उन्होंने तमिलनाडु तमिल मनवर मंडराम नामक एक छात्र संगठन की स्थापना की, जो द्रविड़ आंदोलन का पहला छात्र विंग था। करुणानिधि ने स्वयं और छात्र समुदाय को अन्य सदस्यों के साथ सामाजिक कार्य में शामिल किया। यहां उन्होंने अपने सदस्यों के लिए एक समाचार पत्र शुरू किया, जो द्रमुक पार्टी के आधिकारिक अख़बार मुरासोली में बढ़ी।

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गौरतलब है कि करुणानिधि के साथ ही देश की राजनीति का एक के इतिहास का एक पन्ना भी समाप्त हो गया। देश और अपने इलाके के विकास के लिए करुणानिधि का दिया गया योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

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