Jet Airways लुटने के कगार पर, जनता को अपने टैक्स के पैसे से चुकाना होगा 2600 करोड़, पढियें

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Jet Airways एक जानी मानी एयरलाइन कंपनी है जो की अब बंद होने के कगार पैर है। ऐसे में वो राज जो पिछले कई सालों से छुपाया जाता रहा है। वो राज हम आपको बताने जा रहे हैं। जेट एयरवेज की कहानी बड़ी दिलचस्प और अलग है।

1. देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनियों में से एक है जेट

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देश में जेट एयरवेज का नाम टॉप कंपनियों में शुमार है। अपनी बेहतरीन सर्विस के लिए जाने जाते जेट एयरवेज की उड़ानें पूरी दुनिया में मुसाफिरों को पहुंचाती हैं। दुबई की एतिहाद एयरवेज का भी इस कंपनी में काफी हिस्सा है। ये कंपनी भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड है। हालाँकि आजकल इस कंपनी के शेयर आज कल कुछ ख़ास नहीं कर पा रहे हैं लेकिन निवेशकों का यकीन आज भी इस कंपनी में है।

2. विदेशी उड़ानों का परमिट पाने वाली पहली कम्पनी थी जेट

बात तब की है जब देश में मौजूद निजी विमान कंपनियों को सिर्फ देश में ही उड़ान सेवाएं देने की मंजूरी थी। इस वक़्त देश में भाजपा सरकार का शासन था। सरकार देश के विमानन क्षेत्र को विकसित करने के लिए इस क्षेत्र में एफडीआई लाने की तैयारी में लगी हुई थी। जब इस क्षेत्र में एफडीआई निवेश को अनुमति मिली तो इंटरनेशनल फ्लाइट्स की मंजूरी पाने वाली जेट एयरवेज पहली कंपनी थी।

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जेट की उड़ानों के पर कुतरने के लिए सरकार अमेरिकन कम्पनी एयरवेज इंक ने एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने जेट एयरवेज के निवेशकों के बारे में गंभीर आरोप लगाए थे।

3. अलकायदा से जुड़े होने का था आरोप

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अमेरिकन कम्पनी एयरवेज इंक का कहना था कि इस कंपनी में अलकायदा का पैसा लगा हुआ है। कंपनी के इस आरोप की भारत सरकार द्वारा कोई जांच नहीं की गई और न ही उसकी उड़ानों पर रोक लगाई गई। इस दौरान देश की खुफ़िआ एजेंसी आईबी ने लालकृष्ण अडवाणी को भी खबर दी थी।

आईबी ने जेट के मालिक नरेश गोयल की छोटा शकील और दाऊद के साथ फ़ोन पर बातचीत के रिकॉर्ड होने की बात भी अडवाणी को बताई थी लेकिन इस महान पुरुष द्वारा बात ठन्डे बस्ते में डाल दी गई।

4. नीरव मोदी और गुप्ता बंधुओं के ख़ास हैं गोयल

देश की जनता का पैसा लेकर विदेश भागे नीरव मोदी और दक्षिण अफ्रीका के गुप्ता बंधुओं के साथ गहरे सम्बन्ध हैं। मीडिया तक ये खबर भी पहुंची है कि गुप्ता बंधुओं का भारी-भरकम कस्टम ड्यूटी का सामान जेट एयरवेज के जरिये चुपके से इधर से उधर किया जाता है।

निष्कर्ष:

देश में न खाऊंगा न खाने दूंगा का भाषण देने वाली पार्टी; “ले जाऊंगा और ले जाने दूंगा” की नीति पर काम करती आ रही है।

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